गणपति गली

गणेश चतुर्थी 2026

यह उत्सव समाप्त हो चुका है, पर पंडाल खुला है।

  1. झाँकी दर झाँकी चलिए
  2. हर झाँकी में एक सेवा कीजिए
  3. सेवा पूरी होते ही अगली झाँकी खुलेगी

← → तीरों से झाँकियाँ देखिए

बाप्पा का आगमन

बाप्पा पटले पर विराजमान हैं। उन्हें उठाकर सजी हुई चौकी पर बिठाइए।

प्राण प्रतिष्ठा

मूर्ति में प्राण आते हैं। हाथ रखिए और रोके रखिए — जब तक तेज न फैल जाए।

दूर्वा अर्पण

बाप्पा को दूर्वा सबसे प्रिय है। इक्कीस दूर्वा चढ़ाइए — थाली को छूते जाइए।

खेल और अर्पण

यहाँ तीनों एक ही जगह हैं — लड्डू लूटिए, मूषक दौड़ाइए, और जो कमाया वो बाप्पा को अर्पित कीजिए। खेल जितनी बार चाहें खेलिए; भंडार खाली हो तो फिर से कमा लीजिए।

सुखकर्ता दुखहर्ता

दीप जल चुके हैं। थाली उठाइए और बाप्पा के सामने घड़ी की दिशा में घुमाइए।

विसर्जन

घर लौटने का समय। बाप्पा को धीरे-धीरे जल में ले जाइए — अगले बरस तुम जल्दी आना।

खुलेगा 25 सितंबर